अजय और मीरा दो बहन-भाई थे वो लोग एक छोटे से गांव में रहते थे। एक दिन उन्हें पुरानी छतरी के नीचे एक ज़बरदस्त नक्शा मिला, जिसमें एक खोया हुआ खजाने का रास्ता दिखाया गया था।

‎दोनों ने तय किया कि वे उस खजाने को खोजेंगे।

‎रात होते ही वे अपनी छोटी सी टॉर्च लेकर जंगल की तरफ निकल पड़े। रास्ते में उन्हें पेड़ों के पीछे छिपे जंगली जानवरों की आवाज़ें सुनाई दीं, लेकिन वे डर से नहीं रुके। नक्शे के अनुसार, उन्हें एक बड़े पत्थर के नीचे खुदाई करनी थी।

‎जैसे ही उन्होंने खुदाई शुरू की, अचानक जमीन हिलने लगी और एक गुफा का दरवाज़ा खुल गया।

‎गुफा के अंदर चमकीले रत्न और सोने के सिक्के बिखरे थे। लेकिन तभी गुफा की रोशनी बुझने लगी और दरवाज़ा बंद हो गया! अजय ने हिम्मत नहीं हारी और अपनी टॉर्च की रोशनी तेज कर दी।

‎मीरा ने पास रखा एक पुराना तीर और धनुष निकाला और दरवाज़ा खोलने की कोशिश करने लगी।

‎अंत में, उनकी समझदारी और साहस से दरवाज़ा खुल गया और वे दोनों खजाने के साथ सुरक्षित बाहर निकले। गाँव लौटकर उन्होंने खजाने को सबके साथ बांटा और सभी ने उनकी बहादुरी की तारीफ की।

‎